अभिव्यक्ति की आजादी का हनन, मानवाधिकारों का दमन

उत्तराखंड इंसानियत मंच की ओर से ‘बंधुत्व और संवाद’ विचार गोष्ठी

विश्व मानवाधिकार दिवस के मौके पर शनिवार को देहरादून में आयोजित एक गोष्ठी में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन और मानव अधिकारों के दमन पर गंभीर चिन्ता जताई गई। हालांकि इस बात पर संतोष भी जताया गया कि देश में सैकड़ों संगठन अपने-अपने स्तर पर इन स्थितियों के विरोध में आवाज उठा रहे हैं और यह आवाज लगातार मजबूत हो रही है।

राजपुर रोड स्थित एक होटल में उत्तराखंड इंसानियत मंच की ओर से ‘बंधुत्व और संवाद’ विषय आयोजित विचार गोष्ठी में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज मदन बी. लोकुर ने मौजूदा दौर की तमाम समस्याओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज एक वर्ग की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगातार हमले हो रहे हैं, तो एक अन्य वर्ग को कुछ भी कहने और करने की आजादी दी गई है। उन्होंने हाल के दौर में विभिन्न आंदोलनों को कुचले जाने और और सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों की हेट स्पीच का जिक्र करते हुए कहा कि वे गोली मारने तक की धमकी देते हैं तो कुछ नहीं होता। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में हेट स्पीच के की व्याख्या की है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की है कि हेट स्पीच को लेकर कानून स्पष्ट है, लेकिन उसे क्रियान्वित किये जाने की जरूरत है।

बंधुत्व और संवाद विषय पर आयोजित गोष्ठी में मंच पर मौजूद थे, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मदन बी. लोकुर, सामाजिक कार्यकर्ता प्रो. आनन्द कुमार, पर्यावरणविद् प्रो. रवि चोपड़ा और सर्वोदयी कार्यकर्ता बीजू नेगी

जस्टिस लोकुर ने कहा कि आज हमारी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता खतरे में है। बुल्डोजर जस्टिस का दौर है। सामाजिक ध्रुवीकरण बढ़ाने के लगातार प्रयास हो रहे हैं। ऐसे कानून बनाये जा रहे हैं, जो इस धु्रवीकरण को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि बंधुत्व और लोकतंत्र एक सिक्के के दो पहलू हैं। बिना बंधुत्व के हम लोकतंत्र की कल्पना नहीं कर सकते, लेकिन आज लोकतंत्र की दुहाई देकर भाईचारे पर लगातार प्रहार किया जा रहा है।

मानवाधिकार कार्यकर्ता प्रो. आनन्द कुमार ने कहा कि लोकतंत्र की चार नहीं सात स्तंभ हैं। विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका, मीडिया मुगल के अलावा लगातार हारने वाली पार्टियां, विद्वत समाज और सिविल सोसायटी भी लोकतंत्र के स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि आज जरूरत इस बाद की है कि नागरिक समाज शासकों को लोकतंत्र का कहकरा सिखाये, क्योंकि सत्ता ऐसे लोगों के हाथों में आ गई है, जिन्हें लोकतंत्र का कोई ज्ञान नहीं है।

प्रो. आनन्द कुमार ने कहा कि आज धर्म और राष्ट्र के बारे में बोलना गुनाह हो गया है। असहमति के स्वर को कुचलने के प्रयास हो रहे हैं। किसी भी असहमत व्यक्ति को देशद्रोही घोषित किया जा रहा है और पाकिस्तान जाने की सलाह दी जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि इसी तरह से असहमतियों को कुचला जाता रहा तो दबाई गई यह आवाज किसी दिन ज्वालामुखी बनकर फटेगी और सब कुछ तहस-नहस हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आज देश में कमाई यानी रोजगार, दवाई यानी स्वास्थ्य सेवाएं, पढ़ाई यानी चरमराती शिक्षा व्यवस्था और लड़ाई यानी साम्प्रदायिक वैमनस्य देश की सबसे बड़ी समस्याएं हैं।
उन्होंने कहा कि हालत बेहद गंभीर हैं, लेकिन यह संतोष की बात है कि देशभर में उत्तराखंड इंसानियत मंच जैसे हजारों संगठन हैं, जो अपने-अपने स्तर पर लोकतंत्र को बचाने और भाईचारा बनाये रखने के लिए काम कर रहे हैं।

इस गोष्ठी का संचालन सर्वाेदयी कार्यकर्ता बीजू नेगी ने किया। पर्यावरणविद् प्रो. रवि चोपड़ा ने गोष्ठी के प्रश्नोत्तर कार्यक्रम का संचालन किया। गोष्ठी में बड़ी संख्या में सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग, एक्टिविस्ट, लॉ और शोध छात्रा-छात्राएं और आम नागरिक शामिल हुए।

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