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uttarakhand disaster

समय पर चेतते तो बच जाता जोशीमठ

यह डायरी धंसते-दरकते जोशीमठ की तीन दिन की यात्रा का वृतांत लिखने का प्रयास है। डायरी के कुछ हिस्से हेराल्ड ग्रुप के अंग्रेजी अखबार नेशनल हेराल्ड, हिन्दी अखबार नवजीवन और उर्दू अखबार कौमी आवाज ने प्रकाशित किये हैं। यहां सम्पूर्ण डायरीप्रकाशित…

2 जनवरी की आधी रात क्या हुआ था जोशीमठ में??

Trilochan Bhatt दो जनवरी की आधी रात के बाद आखिर ऐसा क्या हुआ कि जोशीमठ के एक बड़े हिस्से में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई। जोशीमठ में तीन दिन रहकर मैंने विभिन्न हिस्सों में रहने वाले लोगों से बातचीत की। इस बातचीत में एक बात जो हर मिलने…