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बात बोलेगी

खंड-खंड होते उत्तराखंड के लिए जिम्मेवार कौन, कहां बसेंगे उजड़े लोग

Raju Sajwan Trilochan Bhatt अक्टूबर का महीना है। आमतौर पर हिमालयी राज्य उत्तराखंड में सितंबर के दूसरे हफ्ते तक बारिश बंद हो जाती है और अक्टूबर की शुरुआत में मानसून विदा हो जाता है। राज्य के प्रमुख शहर जोशीमठ जैसे ऊंचाई वाले…

नगर निगम की फाइलों में भूतों का डेरा

देहरादून नगर निगम उत्तराखंड राज्य का पहला और सबसे बड़ा नगर निगम है। 100 वार्डों वाले इस जिले में अनुमान है कि 15 लाख के करीब लोग रहते हैं। अनुमान इसलिए कि 2011 के बाद जनगणना नहीं हुई है और पहले नगर निगम में वार्डों की संख्या 60 थी, जो अब 100…

जलवायु परिवर्तन का असर कम करने में महिलाओं की भूमिका महत्व

विश्व पर्वत दिवस के मौके पर 11 दिसंबर को देहरादून डॉ. आरएस टोलिया स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया। डॉ. आर एस टोलिया फोरम की ओर से हर वर्ष उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव डॉ. आरएस टोरिया की स्मृति में इस कार्यशाला का आयोजन किया जाता है। इस…

उत्तराखंड: काम की फिक्र करो, फिक्र से ज्यादा जिक्र करो

नौकरीपेशा लोगों के बीच कामचोर कर्मचारियों के लिए एक कहावत बड़ी प्रसिद्ध है- काम की फिक्र करो, फिक्र से ज्यादा जिक्र करो, काम हो न हो। यह कहावत हू-ब-हू उत्तराखंड सरकार के कामकाज के तौर-तरीकों पर फिट बैठ रही है। सरकार को राज्य के विकास की तो…

क्या वन्य जीवों का व्यवहार बदल रहा है?

उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष बेकाबू हो रहा है और यदि इस तरफ ध्यान नहीं दिया गया तो यह संघर्ष आरपार की लड़ाई का रूप ले सकता है। वैसे तो उत्तराखंड जैसे वनों की बहुलता वाले राज्य के मानव और वन्य जीवों का संघर्ष होता ही रहा है। लेकिन, पहले…

जिन्दगी भर बिजली-सड़क का इंतजार

सलीम मलिक (रामपुर टोंगिया गांव की आगे की कहानी) रामपुर टोंगिया गांव में कोई अस्पताल नहीं है। सबसे नजदीक का प्राथमिक चिकित्सा केंद्र 6 किमी. दूर पाटकोट है। इसके बाद 12 किमी. दूर कोटाबाग या फिर 32 किमी. की दूरी पर रामनगर। गर्भवती…

खेती चौपट, सरकार मौन

भारतीय वन्यजीव संस्थान ने एक सैंपल सर्वे उत्तराखंड के 15 गांव में किया है, जिसके नतीजे बहुत ही चौंकाने वाले हैं और इस तरफ इशारा करते हैं कि यदि जल्द से जल्द जंगली जानवरों को आबादी वाले क्षेत्रों से हटाया नहीं गया तो उत्तराखंड में खेती…