जोशीमठ के बहाने सनसनी की दरारें

टीवी चैनल पूरे उत्तराखंड में तलाश रहे हैं दरारें

ज से करीब आठ महीने पहले जब जोशीमठ के एक हिस्से में धंसाव बढ़ने लगा था और लोग दहशत में थे तो तब मैंने जोशीमठ जाकर जमीन में धंसाव और घरों में दरारें पड़ने के तीन वीडियो बनाये थे। ये वीडियो बात बोलेगी पर देखे जा सकते हैं। मैंंने अपने वीडियो में वे सभी आशंकाएं भी पहले ही जताई थी, जो आज वास्तव में हो रहा है। लेकिन, तब जोशीमठ में न कैमरे पहुंचे और न ही वहां प्रशासन का कोई नुमाइंदा पहुंचा। और तो और स्थानीय लोगों ने भी इस तरफ ध्यान देने की जरूरत नहीं समझी। केवल वही लोग उन दिनों सक्रिय थे,द जिनके घरों पर दरारें आ गई थी।

अब जबकि जोशीमठ बर्बादी की कगार पर पहुंच चुका है तो तमाम कैमरे यहां हैं। प्रशासन का पूरा अमला जोशीमठ में है। भारी संख्या में पुलिस भेज दी गई है। जोशीमठ के प्रभावितों की बात सुनने के लिए सिर्फ 40 सेकेंड देने वाले राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हाल के दिनों में जोशीमठ के दो चक्कर लगा आये हैं। एक बार तो रात में भी जोशीमठ में गुजार चुके हैं। कैमरों और माइकों का जमावड़े के बीच सरकारी पर्यावरणविद् भी जोशीमठ में सक्रिय हैं। खास बात यह है कि यह सारा का सारा जमावड़ा इस होटल के लिए है, जिसे तोड़ा जाना है। दरअसल टूटता भवन एक सनसनी होता है। इसके विजुअल्स टीआरपी बटोरने वाले होते हैं। बस ये कैमरे इसलिए यहां है कि धराशाही होते होटल की लाइव तस्वीरें अपने टीवी चैनल पर दिखा सकें और सनसनी वाली टीआरपी बटोर सकें।

कुछ वर्ष पहले एक हिन्दी फिल्म आई थी, पीपली लाइव। यह फिल्म इन दिनों जोशीमठ में साकार हो रही है। कोई ऐसा चैनल नहीं जो यहां न हो। हमारे पीपली लाइव चैनल किस कदर सनसनीबाज हो गये हैं, इसका उदाहरण इन दिनों देखा जा सकता है। टीवी चैनल दरारों से भरे पड़े हैं। दरारें खोजी जा रही हैं। पूरे उत्तराखंड में दरारें तलाशी जा रही हैं। और इन दरारों को ऐसे दिखाया जा रहा है, मानों पूरे उत्तराखंड में दरारें आ चुकी हों।यह सच है कि उत्तराखंड में उन सभी जगहों पर दरारें देखी जा सकती हैं, जहां कोई प्रोजेक्ट बन रहा हो। अब से दो वर्ष पहले मैंने पर्यावरण संबंधी लेख छापने वाले एक पोर्टल मोंगाबे में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन से टिहरी जिले की दोगी पट्टी में पानी के स्रोत सूख जाने पर एक विस्तृत लेख लिखा था। आज जोशीमठ से लौटते हुए उनमें से एक गांव अटाली गया तो पता चला कि रेलवे लाइन का काम बढ़ने के साथ ही इस गांव में दरारें पड़ने लगी हैं। गांव के घरों और खेतों में वास्तव में दरारें पहले से ज्यादा चौड़ी हो गई हैं। इस गांव में जाकर देखा तो एक सनसनीबाज चैनल का कैमरा पहले से वहां मौजूद था। उम्मीद से अटाली की दरारों पर उसने एक बार फिर खूब सनसनी बटोरी होगी।

दिल्ली और देहरादून से जो भी चैनल वाले पत्रकार जोशीमठ पहुंचे और कई दिनों तक उस होटल के सामने ेजमे रहे, जिसे तोड़ा जाना था, उन चैनल वालों को जोशीमठ के ठीक पहले वह कचरे का ढेर नजर नहीं आया, जिसके निस्तार के लिए उस पर आग लगा दी गई है और चारों तरफ फैला दमघोंटू धुआं नजर नहीं आया। उन्हें बाकी कुछ भी नजर नहीं आने वाला है, हालांकि फिलहाल ये सनसनीबाज चैनल अभी कुछ दिन और जोशीमठ में रुकने वाले हैं। इसी बीच इन चैनलों की कुछ अन्य टीमें उत्तराखंड में अन्य जगहों पर जाकर दरारें तलाश रही हैं। इन दरारों के माध्यम से चैनल के लिए सनसनी वाली टीआरपी बटोरने के साथ ही ये चैनल एक दूसरा काम भी कर रहे हैं। इन दरारों और जोशीमठ में धंसाव के लिए जिम्मेदार परियोजनाओं को क्लीन चिट देने और स्थानीय लोगों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराने का प्रयास चैनल ईमानदारी से कर रहे हैं।

जोशीमठ से लौटते ही एक चैनल ने मुझे अपने एक शो में अपनी बात रखने के लिए बुलाया और पूछा कि क्या मैं नहीं मानता कि इसके लिए स्थानीय लोग भी जिम्मेदार हैं। मैंने जो कहा, उससे बेचारे एंकर का प्रोपेगैंडा धरा का धरा रह गया। मुझे उम्मीद है वह कार्यक्रम नहीं दिखाया जाएगा। बहरहाल प्राइवेट चैनलों से लेकर सरकारी पर्यावरणविद् तक जोशीमठ के भूधंसाव के लिए जोशीमठ के लोगों को जिम्मेदार ठहराने का भरसक प्रयास कर रहे हैं। जाहिर है यह सब प्रयास जोशीमठ का पेट फाड़कर टनल खोदने वाली एनटीपीसी को क्लीन चिट देने के लिए हो रहा है। हालांकि इन चैनलों में जोशीमठ में जमकर विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है। ऐसे वक्त में इन चैनलों और इन पर्यावरणविद्ों से सावधान रहने की जरूरत है।

 

सहयोग की अपील

आज जबकि मुख्यधारा का मीडिया दलाली और भ्रष्टाचार के दलदल में है। पोर्टल वालों को सत्ता की तरफ से साफ निर्देश हैं कि सरकारी लाभ पाना है तो सिर्फ सरकार की तारीफ करो। ऐसे में हम ‘सरकार नहीं सरोकारों की बात’ ध्येय वाक्य के साथ बात बोलेगी पोर्टल और यूट्यूब चैनल चलाने का प्रयास कर रहे हैं। इस मुहिम को जारी रखने के लिए हमें आपके सहयोग की आवश्यकता है।

इस बार कोड को स्कैन कर यथासंभव आर्थिक सहयोग करें।

 

Leave A Reply

Your email address will not be published.