उत्तराखंड को रौंदने का सुनहरा मौका

नए वर्ष पर 4 दिन तक 24 घंटे शराब की दुकानें खुली रहेंगी

या साल आ रहा है। पिछले कुछ वर्षों से इस मौके पर उत्तराखंड में पर्यटकों की आमद बढ़ जाती है। यह अच्छी बात है। हम पर्यटकों का दिल खोल कर स्वागत भी करते हैं और किससे कुछ लोगों को रोजगार मिल जाता है। लेकिन, इसका अर्थ क्या यह है कि यहां पर्यटन के नाम पर आने वालों को कुछ भी करने की छूट दे दी जाए? हम अपनी देवभूमि के दायरे में रहते हुए, अपनी मर्यादाओं का पालन करते हुए भी पर्यटकों और तीर्थयात्रियों का स्वागत करते रहे हैं। यह क्या कि पर्यटक बनकर आने वाले गुंडे-मवाली मनमानी कर सकें, हुड़दंग मचा सकें, देवभूमि को रौंद सकें, इसका भी हम इंतजाम कर दे रहे हैं।नए वर्ष पर 30 दिसंबर से 2 जनवरी तक शराब की दुकानें 24 घंटे खुली रखने का सरकारी फरमान तो यही बता रहा है कि हम पर्यटन को नहीं, नयी साल पर पहाड़ों को रौंदने आने वाले हुड़दंगियों को बढ़ावा दे रहे हैं।

देर रात शराब हुड़़दंगियों को चाहिए
यह बात सच है कि पर्यटक जब भी किसी पर्यटन स्थल पर पहुंचते हैं तो पूरी तरह रिलेक्स के मूड में होते हैं और अक्सर शराब का सेवन करते हैं। यही वजह है कि दुनिया सभी पर्यटकों स्थलों पर शराब की दुकानें होती हैं। जो वास्तव में पर्यटक होते हैं वे समय पर अपने लिए शराब खरीद लेते हैं और इसके लिए राज्य में 11 बजे तक का समय तय है। आधी रात या उसके बाद शराब के ठेके पर पहुंचने वाले सिर्फ हुड़दंगी हो सकते हैं, पर्यटक नहीं। क्या यह बात सरकार को समझ नहीं आती। वह भी उस सरकार को जिसने पिछले विधानसभा चुनाव में अपने घोषणा पत्र में कहा था कि पहले शराब की दुकानें कम करेंगे और धीरे-धीरे बंद करेंगे।

इस मामले को लेकर बात बोलेगी की ओर से सोशल मीडिया पर एक सर्वे करवाया गया था, नये साल को मनाने के तौर-तरीकों के बारे में। आपकों यह जानकार अफसोस होगा कि ज्यादातर लोगों ने नये साल पर देर रात तक किये जाने वाले हुड़दंग और शोर-शराबे पर घोर अरुचि जताई। सर्वे में पूछे गये गये सवाल और उनके जवाब इस आये-

1. हाल के वर्षों में नया साल मनाने के तौर-तरीके बदले हैं। क्या आपने ऐसा महसूस किया?
हां 85 प्रतिशत
नहीं 12 प्रतिशत
कुछ हद तक 17 प्रतिशत
पता नहीं 7 प्रतिशत

2. नया साल मनाने के नाम पर जमकर हुडदंग होता है और पटाखे छोड़े जाते हैं। क्या यह ठीक है?
हां 13 प्रतिशत
नहीं 73 प्रतिशत
कुछ हद तक 13 प्रतिशत
पता नहीं 0 प्रतिशत

3. त्योहारों के इस बिगड़े या बदले स्वरूप के लिए आप किसे जिम्मेदार मानते हैं?
व्यवस्था को 21 प्रतिशत
बाजार को 32 प्रतिशत
नागरिकों को 47 प्रतिशत
पता नहीं 0 प्रतिशत

4. नया साल मनाने के नाम पर आधी रात के बाद तक डीजे बजाना और शोर-शराबा करना क्या उचित है?
हां 17 प्रतिशत
नहीं 76 प्रतिशत
कुछ हद तक 6 प्रतिशत
पता नहीं 0 प्रतिशत

लोगों को पसंद नहीं हुड़दंग
राज्य सरकार ने बेशक नये वर्ष के मौके पर 24 घंटे शराब की दुकाने और रेस्टोरेंट आदि खुले रखने की अनुमति दी हो। लेकिन, सर्वे के नतीजे बताते हैं कि लोग देर रात तक जश्न मनाने के पक्ष में नहीं हैं। 73 प्रंितशत लोगों ने माना कि आधी रात के बाद तक हुड़दंग करना और पटाखे छोड़ना ठीक नहीं है। इसी तरह 78 प्रतिशत लोगों ने जश्न के नाम पर देर रात तक डीजे बजाने और शोर-शराबा करने को अनुचित बताया। ज्यादातर लोगों ने त्योहारों मनाने के इस बिगड़े स्वरूप के लिए मुख्य रूप से आम नागरिकों को जिम्मेदार माना। ऐसा मानने वाले लोगों की संख्या 47 प्रतिशत है। यह भी एक ट्रेंउ हाल के वर्षों में चला है, जो भी बुरा हो रहा है उसके लिए नागरिकोंको जिम्मेदार ठहराने का। इसके बावजूद 21 प्रतिशत लोगों ने व्यवस्था को और 32 प्रतिशत ने बाजार को जिम्मेदार माना। 63 प्रतिशत लोगों ने कहा कि हाल के वर्षों में नया साल मनाने के तौर-तरीकों में बदलाव आया है।

सोशल मीडिया उबला
संतोष की बात यह है कि सरकार के इस गैर जिम्मेदाराना फैसले का सोशल मीडिया पर जमकर प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है। ज्यादातर लोगों ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। अखिलेश डिमरी ने लिखा, एक तो देवभूमि और उस पर हरिश्चन्द्र, तो सतयुग तो समझिए द्वार पर है। देवभूमिवासियों को 4 दिन तक चौबीसों घंटे शराब मिलने की बधाई। वरिष्ठ पत्रकार रमेश पहाड़ी ने लिखा, खुश खबरी। मोदी सालभर राशन फ्री दे रहे हैं। धामी जी रात-दिन शराब दें, वह भी मुफ्त तो सोने पर सुहागा न हो जाएगा। शिल्पा भट्ट बहुगुणा ने लिखा, आम लोग अपनी दुकान 10 मिनट भी ज्यादा खोल दें तो तुरंत बंद करवा दी जाती है।

 

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