नये सूचना आयुक्तः तपती दुपहरी में ठंडी हवा का झोंका

जनपक्षीय पत्रकारिता के पुरोधा योगेश भट्ट को सूचना आयुक्त बनाना सराहनीय फैसला

तीन दशक से जनपक्षीय पत्रकारिता कर रहे, प्रखर राज्य आंदोलनकारी और मेन स्ट्रीम मीडिया से विदाई के बावजूद सोशल मीडिया पर धारदार लेखन करने वाले योगेश भट्ट को राज्य का सूचना आयुक्त बनाया गया है। यह जनपक्ष से जुड़े तमाम लोगों के लिए चौंकाने वाली, लेकिन लू के थपेड़ों के बीच ठंडी हवा के झोंके जैसी है। इस नियुक्ति पर डॉ. एसपी सती की यह त्वरित टिप्पणी काफी कुछ कह जाती है।

डॉ. एसपी सती लिखते हैं, श्री योगेश भट्ट की सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्ति जेठ की तपती दुपहरी में सल्ल से ठंडी हवा का झौंका जैसा है। जब हर तरफ अयोग्यताओं का बोलबाला हो, जहां हर तरफ अराजकता पसरी हो, वहां योगेश को इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया जाना कुल मिला कर सरकार के प्रति सकारात्मक माहौल बनने का एक कृत्य माना जा सकता है।

योगेश की ढाई दशक की जनपक्षीय पत्रकारिता का बेदाग सफर उसके व्यक्तित्व की बानगी भर है। योगेश जो देखा वो लिखा वाली सिखंडी पत्रकारिता से इतर खबर का पेट फाड़ कर जो विश्लेषण करते रहे, वह अपने आप में विलक्षण है। उनके पत्रकारिता जीवन पर कोई भी यह नहीं कह सकता कि वो किसी एक पक्ष की तरफ झुके थे। उनकी पक्षधरता सिर्फ जनपक्ष कही जा सकती है।

योगेश से मेरी मुलाकात शायद 7 नवम्बर 1995 को श्रीयंत्र टापू पर श्रीनगर में हुई थी। जब वो वहां राज्य आंदोलन के तहत चल रहे अनशन में हिस्सा लेने के लिए आए। थे। बाइस तेईस साल का बच्चा। इस दौरान दस नवंबर को हमको बर्बर तरीके से कूट पीट कर सहारनपुर जेल में ठूंसा गया। वहां उन चौदह दिनों में योगेश छोटा भाई बन गया। बदमाश शरारती भी और कुछ हट कर करने का जज्बा रखने वाला भी।। योगेश के धुर विरोधी भी उसके जज्बे के मुरीद हैं।

इस बीच योगेश को जो मैंने पाया उससे मेरी उसके प्रति अवधारणा और पुख्ता हुई कि यह लड़का चट्टान की तरह है। इस बीच उसकी जिंदगी में काफी उतार चढ़ाव भी आए। धमकियों से लेकर प्रलोभनों तक योगेश के पास पत्रकारिता के सैकड़ों एक्सपीरिएंस हैं। मेरा दृढ़ विश्वास है कि योगेश सूचना आयुक्त के रूप में शानदार कार्य करेंगे।

एक्टिविस्ट और चकबंदी आंदोलन के कपिल डोभाल ने लिखा, राज्य आंदोलन के अग्रणी चिन्तक, राज्य हित के पथ प्रदर्शक, वरिष्ठ पत्रकार योगेश भट्ट जी को राज्य सूचना आयुक्त बनाना एक अभूतपूर्व फैसला है। अरुण नेगी ने लिखा, पहली बार सूचना आयुक्त ऐसे व्यक्ति बने हैं, जिनकी पत्रकारिता का कायल उत्तराखंड में हर विचारधारा से जुड़े लोग हैं। हम सब सरकार के इस कदम की प्रशंसा करते हैं। जयदीप सकलानी लिखते हैं, उत्तराखंड के नव नियुक्त सूचना आयुक्त भाई योगेश भट्ट को हार्दिक बधाई। सरकार द्वारा अब तक लिया गया सबसे बढ़िया फैसला। उम्मीद नहीं विश्वास है, योगेश की काबिलियत पर।

चुनौतियां भी बड़ी होंगी
योगेश भट्ट को सूचना आयुक्त के रूप के कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ेगा। आमतौर पर सरकारें ऐसे पदों पर उन लोगों को बिठाती रही हैं, जो सरकारों के अनुसार काम करे। किसी खास पार्टी के हित में काम करे। लेकिन, योगेश भट्ट जैसे जनपक्ष से जुड़े व्यक्ति को इन हालातों में काम करने में चुनौतियांे का सामना करना होगा। भाजपा जैसी पार्टी के साथ काम करना उनके लिए आसान नहीं होगा। लेकिन, योगेश भट्ट पहले भी चुनौतियों का सामना करते रहे हैं। उम्मीद की जानी चाहिए वे अपने तेवरों के साथ समझौता न करके इस पद पर काम करेंगे। हमें पूरा विश्वास से है योगेश भट्ट जैसे सुयोग्य व्यक्ति इस पद की गरिमा का चार चांद लगाएंगे।

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