उत्तरााखंड का इतिहास-5 : हरीश रावत का कार्यकाल

बात बोलेगी के इतिहास बोध स्तंभ में अब तक उत्तराखंड के इतिहास के चार खंड प्रकाशित किये जा चुके हैं। पहले तीन खंडों में प्राचीन काल से राज्य स्थापना तक की प्रमुख बातों को संकलित किया गया है। चौथे खंड में राज्य स्थापना से लेकर विजय बहुगुणा के कालखंड तक के प्रमुख घटनाओं को संकलन किया गया है। इस पांचवें खंड में राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में हरीश रावत के कार्यकाल की घटनाओं का संकलन किया गया है। इस स्तंभ के अगले हिस्सा में उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास को प्रमुख घटनाक्रम के रूप में प्रकाशित किया जाएगा। सभी पाठकों से निवेदन है कि कहीं कोई तथ्यात्मक भूल हो तो तुरंत कंमेंट बॉक्स में सूचित करें, ताकि सुधार किया जा सके।

एक -2014
– 01 फरवरी, 2014 का दिन उत्तराखंड की राजनीति में बेहद उथल-पुथल और अनिश्चितता भरा रहा।
– यह तय हो गया था कि श्री विजय बहुगुणा को हटा दिया गया है, लेकिन अगला मुख्यमंत्री कौन होगा।
– हरीश रावत दिल्ली से देहरादून पहुंच गये थे और उनके समर्थक परेड ग्राउंड में उनके राजतिलक का गवाह बनने के लिए जुटने शुरू हो गये थे।
– दिनभर की ऊहापोह के बाद देर शाम हरीश रावत को मुख्यमंत्राी पद की शपथ दिला दी गयी।
– हरीश रावत ने मंत्रिमण्डल में कोई पफेरबदल न करके सभी मंत्रियों को पूर्ववत् अपने मंत्रिमंडल में सम्मिलित कर दिया, लेकिन किसी को कोई विभाग नहीं दिया।
– मौखिक रूप से कह दिया गया कि जो मंत्राी जिस विभाग को देख रहा था, उसी का काम देखेगा।
– सभी विभागों के काम हरीश रावत ने स्वयं ही देखने प्रारम्भ कर दिये।
– मुख्यमंत्री बनने के साथ ही उन्होंने सुबह से लेकर देर रात तक काम करना शुरू कर दिया।
– विभिन्न विभागों के अधिकारियों की बैठक लेने के साथ ही समय निकालकर वे राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में दौरे भी करते रहे और विकास कार्यों की समीक्षा व घोषणा भी।
– मुख्यमंत्राी के रूप में हरीश रावत ने पहला महत्वपूर्ण कार्य केदारनाथ में पुनर्निर्माण का किया।
– राष्ट्रीय पर्वतारोहण संस्थान उत्तराकाशी की देखरेख में केदारनाथ में सर्दियों मंे भी पुनर्निर्माण कार्य जारी रहे और इस मामले में निम ने कई रिकार्ड भी बनाए।
– हरीश रावत के साथ कई विवाद और विवादित व्यक्ति भी जुड़े रहे।
– सबसे बड़ा विवाद उनके साथ खनन माफिया के साथ मिलीभगत का लगा।
– हरिद्वार के मातृसदन और कई अन्य संगठन गंगा और अन्य नदियों से रेत चुगान का विरोध किया।
– मलेथा में छह स्टोन क्रशर लगाने का मामला भी काफी समय तक हरीश रावत सरकार के गले की हड्डी बना रहा।
– आखिरकार राज्य सरकार को इन सभी स्टोन क्रशरों को बंद करने का आदेश देना पड़ा।
– हरीश रावत पर शराब माफिया, भूमाफिया, बजरी-रेत माफिया आदि से मिलीभगत के आरोप भी निरन्तर लगाये जाते रहे हैं।
– नैनीसार प्रकरण में उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी के नेता श्री पी.सी. तिवारी तथा अन्य की गिरफ्तारी ने श्री रावत की कार्यशैली में एक और सवालिया निशान लगाया।
– रानीखेत के द्वारसों में नैनीसार बचाओ संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार पर भूमाफिया, खनन माफिया और शराब माफिया के इशारों पर काम करने का आरोप लगाया है।

दो- 2016
– 14 मार्च- भाजपा की रैली में विधायक गणेश जोशी पर पुलिस के घोड़े शक्तिमान को घायल करने का आरोप लगा। विधायक समेत कई के खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज।

-15 मार्च- विधानसभा सदन में विपक्ष और सत्ता पक्ष ने शक्तिमान को लेकर किया हंगामा। सदन से बाहर भी विधायक के खिलााफ प्रदर्शन हुआ।

16 मार्च- शक्तिमान के घायल होने के वीडियो को आधार बनाकर विधायक की गिरफ्तारी की रणनीति हुई तैयार।

17 मार्च- दिनभर पुलिस ने भाजपा नेताओं के लिए हल्द्वानी और दून में दबिश दी। एक गिरफ्तारी भी हुई।

18 मार्च- विधायक गणेश जोशी एक होटल से गिरफ्तार हुए तो शाम को विधानसभा में नौ कांग्रेस के विधायकों ने विनियोग विधेयक पारित करने के लिए भाजपा के साथ मिलकर वोटिंग की मांग की। बागी विधायक भाजपा के साथ मिलकर राज्यपाल से मिले और विश्वास मत की मांग करने के बाद दिल्ली रवाना हुए।

19 मार्च- राज्यपाल ने सीएम हरीश रावत को 28 मार्च तक बहुमत साबित करने के लिए भेजा पत्र। सरकार ने बागी विधायकों के घर पर दल बदल कानून के तहत सदस्यता निरस्त करने का नोटिस चस्पा किया।

20 मार्च- विधानसभा अध्यक्ष ने 28 मार्च को सदन आहूत करने का पत्र सदस्यों को भेजा।

21 मार्च- भाजपा और कांग्रेस के बीच छिड़ी सियासी जंग राष्ट्रपति दरबार में पहुंची। भाजपा ने 18 मार्च को हुए हंगामे को आधार बनाकर सरकार बर्खास्त करने की रखी मांग।

24 मार्च- विधानसभा अध्यक्ष में दल-बदल कानून के तहत नौ विधायकों की सदस्यता समाप्त करने संबंधी नोटिस दिया।
25 मार्च- बागी विधायकों ने दल बदल कानून को आधार बनाकर सदस्यता समाप्त करने के नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने स्पीकर के खिलाफ याचिका खारिज कर दी।

26 मार्च- सीएम हरीश रावत का स्टिंग सामने आया। जिसमें बागी विधायकों को मनाने के लिए खरीद फरोख्त की जिक्र कर रहे थे।
27 मार्च- केन्द्र सरकार ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी। विधानसभा अध्यक्ष ने बागी विधायकों की सदस्यता समाप्त कर दी।

28 मार्च- पूर्व सीएम हरीश रावत राष्ट्रपति शासन लागू करने के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट गए।

29 मार्च- कांग्रेस के नौ बागी विधायकों ने सदस्यता समाप्त करने के विरोध में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई।

30 मार्च- हाईकोर्ट की सिंगल बैंच ने हरीश रावत को सदन में बहुमत साबित करने का आदेश दिया।

31 मार्च- एकल बैंच के निर्णय के खिलाफ डबल बैंच में याचिका दाखिल की गई।

2 अप्रैल- हरीश रावत ने एक और याचिका दाखिल कर बजट अध्यादेश को दी चुनौती।

7 अप्रैल- हाईकोर्ट की डबल बैंच ने फ्लोर के एकल पीठ के निर्णय को 18 अप्रैल तक स्थगित कर दिया।

12 अप्रैल- एकल पीठ ने बागी विधायकों की याचिका पर 23 अप्रैल तक सुनवाई टाली।

18 अप्रैल- राष्ट्रपति शासन के खिलाफ दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हुई।
20 अप्रैल- हाईकोर्ट ने राष्ट्रपति शासन पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, राष्ट्रपति का आदेश राजा का आदेश नहीं होता।
21 अप्रैल- हाईकोर्ट ने राष्ट्रपति शासन समाप्त कर 29 अप्रैल को फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया। विधायकों की सदस्यता समाप्त करने के आदेश यथावत रहे।
22 अप्रैल- हरीश रावत ने फिर पदभार संभाला। केंद्र ने हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
23 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में यथास्थिति (राष्ट्रपति शासन) जारी रखने के आदेश दिये और सुनवाई शुरू की।
6 मई- सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई को फ्लोर टेस्ट करवाने के आदेश दिये। वोटिंग की वीडियोग्राफी के साथ उस दिन 11 से 1 बजे तक राष्ट्रपति शासन हटाये जाने के भी आदेश दिये गये।
9 मई- सुप्रीम कोर्ट ने नौ बागी विधायकों की याचिका खारिज की और हाई कोर्ट के उनकी सदस्या संबंधी फैसले को बरकरार रखा। ?
10 मई- राज्य विधानसभा को फ्लोर टेस्ट हुआ। नौ बागी विधायक शामिल नहीं हो पाये। फैसला बंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट के पास भेजा गया।

11 मई- सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट के नतीजों के आधार पर हरीश रावत को मुख्यमंत्री के रूप में काम करने के आदेश दिये। इसी के साथ राज्य में राष्ट्रपति शासन समाप्त हो गया।

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