मेरी बात

  • Trilochan Bhatt

 

 

हृदय साथियों का आदेश है कि मैं अन्य तमाम साथियों की तरह एक पोर्टल शुरू करूं। हालांकि मैं लगातार मना करता रहा। यह सोच कर कि हर कोई पोर्टल शुरू करेगा तो उसे पढ़ेगा कौन? मैं टालता रहा और अंततः पूरे अपनत्व के साथ मित्र डॉ. अजय ढौंडियाल ने ‘बात बोलेगी‘ पोर्टल अपने खुद के खर्च पर बनवा कर यह कहते हुए मेरे हवाले कर दिया कि मैं नियमित रूप से इस अपडेट करता रहूं। कुछ खुद लिखूं और कुछ साथियों से लिखवाऊं।

यह सुखद संयोग है कि आज जब इस पोर्टल का सर्वाधिकार मेरे पास आया तो एक दिन बाद 13 नवंबर को मेरी बेटी दीक्षा का जन्मदिन है। एक बेटा और फिर दूसरी संतान के रूप में बेटी का जन्म मेरे लिए बेहद सुखद था और आज बेटी के जन्मदिन पर इस पोर्टल को शुरू करना मेरे लिए बेहद सुखद अनुभूति है।

पोर्टल पर मैं ऐसी क्या सामग्री दूं कि उत्तराखंड में संभवतः हजारों की संख्या में चलाये जा रहे पोर्टल के बीच पाठक मेरे पोर्टल का जाएं और उसमें प्रकाशित सामग्री को पढ़ सकें। लेटेस्ट न्यूज टाइप की सामग्री देना मेरे लिए संभव नहीं और मैं समझता हूं कि जब तमाम ऑनलाइन पोर्टल मिनट दर मिनट खबरें पोस्ट कर रहे हैं तो ऐसे में एक और न्यूज पोर्टल की न तो उपयोगिता है और न ही इसका कोई औचित्य मेरी समझ में आता है।

पिछले कई वर्षों ने पर्यावरण, प्रकृति और आपदाओं पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और पोर्टल पर लिखता रहा हूं। इसके अलावा राज्य में होने वाले तमाम जनांदोलनों से मेरा संबंध रहा है और इनमें भागीदारी करता रहा हूं। ऐसे में मैंने इस नये-नवेले पोर्टल को पर्यावरण और जन मुद्दों के लिए समर्पित करने का फैसला किया है। पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन आज मानव जीवन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। मैं मानता हूं कि इस बारे में हर किसी को ज्यादा से ज्यादा जानकारी होनी चाहिए। मेरा प्रयास होगा कि इस पोर्टल के माध्यम से विभिन्न स्रोतों के माध्यम से पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, आपदा और वन व वन्य जीवन से संबंधित जानकारियों को आप तक पहुंचाऊं। कोविड काल के बाद स्वास्थ्य और स्वास्थ्य सेवाएं बड़ा मुद्दा बन चुका है, इस पर भी नजर रखने की सख्त आवश्यकता महसूस की जाने लगी है। मेरा प्रयास होगा कि जितनी अधिक जानकारियों हों, उन्हें आप तक पहुंचाऊं।

आज हमारे जीवन का हर पहलू राजनीति से प्रभावित होता है, ऐसे में राजनीति के बारे में जानने की जिज्ञासा हम सबकी होती है। राजनीति को लेकर मैं कितना विश्लेषण कर पाऊंगा यह तो भविष्य ही तय करेगा, लेकिन मैं अपने पाठकों को यह विश्वास जरूर दिलाना चाहता हूं कि जब भी मैं राजनीतिक विश्लेषण करूंगा, पूरी ईमानदारी के साथ करूंगा और अपने विचार व सिद्धान्त जबरन पाठकों पर नहीं थोपूंगा।

इस पोर्टल के लिए गांव की बात केटेगिरी मैंने खास तौर पर चुनी है। मेरा प्रयास होगा कि तमाम मित्रों की मदद से गांव जगत की हलचलों को ज्यादा से ज्यादा यहां प्रकाशित करूंगा।

अंत में एक बार फिर मुझे इस शुरुआत के लिए प्रेरित करने वाले सभी मित्रों का आभार।

 

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