आंदोलनकारियों को आधी रात उठा ले गई पुलिस

अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच करवाने पर मुख्यमंत्री को क्यों आपत्ति हैं, पूछ रहा है उत्तराखंड

त्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जब दिल्ली में बलात्कार और हत्या के शिकार बेटी के मां-बाप को मिलकर सांत्वना और हरसंभव मदद का आश्वासन दे रहे थे, उसके कुछ ही घंटों बाद एक और बेटी अंकिता के लिए न्याय मांग रहे लोगों को पुष्कर सिंह धामी की पुलिस आधी रात को ऋषिकेश में धरना स्थल से उठाकर ले गई।

दिल्ली में उत्तराखंड उत्तराखंड की बेटी के साथ सामूहिक दुराचार और हत्या का मामला 12 साल पुराना है। आश्चर्यजनक रूप से सुप्रीम कोर्ट ने हाल के दिनों में इस मामले के आरोपियों को बरी कर दिया, जबकि इससे पहले निचली अदालत और हाई कोर्ट आरोपियों को मौत की सजा सुना चुका था। दिल्ली की बेटी के मामले को लेकर राजधानी देहरादून और उत्तराखंड में जबरदस्त हलचल हुई और उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार भी तुरंत सक्रिय हुई। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की बात ही नहीं कही, बल्कि नगर निगम चुनाव प्रचार के लिए दिल्ली गए पुष्कर सिंह धामी बेटी के माता-पिता को भी मिल कर आए।

दूसरी तरफ एक और बेटी थी अंकिता भंडारी उसकी भी हत्या कर दी गई और उसकी हत्या में भाजपा नेता का बेटा शामिल था। हत्या से पहले अंकिता के साथ क्या कुछ किया गया होगा, यह कभी पता नहीं चल पाएगा, क्योंकि हत्या के बाद सत्ता की शह पर सारे सबूत मिटा दिए गए। उस कमरे को तोड़ दिया गया जिसमें अंकिता रहती थी। लोगों ने इस मामले की सीबीआई जांच करने की मांग की, लेकिन पुष्कर सिंह धामी एसआईटी जांच पर अड़े रहे। एसआईटी ने जो अब तक की है उसे नैनीताल हाई कोर्ट की टिप्पणी से समझा जा सकता है। हाईकोर्ट ने इस मामले में जबरदस्त नाराजगी जताई है, खासकर इस बात पर की घटना के बाद सबूत मिटाने का प्रयास किया गया।

ऋषिकेश में धरनास्थल पर लगातार जुट रहे हैं लोग।

मुख्यमंत्री धामी जिस समय दिल्ली में किरण के माता-पिता से मिलकर दुख जताकर, सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने और हरसंभव मदद करने का राज्य सरकार की तरफ से आश्वासन दे आए थे, उसके कुछ ही घंटे बाद उन्होंने ऋषिकेश में अंकिता मामले की सीबीआई जांच की मांग के लिए धरना दे रहे लोगों को उठाने के लिए पुलिस भेज दी। धरनास्थल पर पहुंचकर पुलिस ने वहां सो रही महिलाओं को जबरन उठाया। कुछ महिलाओं को गाड़ी में डालकर ले जाया गया। महिलाओं के साथ छीना-झपटी की गई और उन्हें चोट भी पहुंचाई गई, ऐसा यहां धरना दे रहे लोगों का कहना है।

यह समझने वाली बात है कि एक तरफ तो दिल्ली की बेटी के मामले को लेकर पुष्कर सिंह धामी उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करने की बात कर रहे हैं और दूसरी तरफ अंकिता भंडारी के हत्यारों को सजा दिलाने की मांग को लेकर धरना दे रहे लोगों को जबरन उठाया जा रहा है। यह पहला मौका नहीं है जब अंकिता को लेकर आंदोलन कर रहे लोगों के साथ पुलिस ने इस तरह जोर-जबर्दस्ती उठाया हो। इससे पहले अंकिता हत्याकांड के आरोपी पुलकित आर्य के रिजॉर्ट की तरफ कूच कर रहे लोगों को भी जबरन गाड़ियों में ठूंसा गया था और गिरफ्तार किया गया था। 2 अक्टूबर को अंकिता भंडारी के मामले को लेकर बंद करवाने के दौरान जब कई दुकानदार जोर जबरदस्ती पर उतर आए थे, तो पुलिस दुकानदारों का साथ दे रही थी।

फिलहाल पुष्कर सिंह धामी किसी भी हालत में अंकिता भंडारी मामले की सीबीआई जांच करवाने के पक्ष में नहीं है और जैसा कि कहा जा चुका है एसआईटी की जांच इतनी लचर स्थिति में है कि अपराधी को छोटी-मोटी सजा मिल पाना भी असंभव प्रतीत हो रहा है। ऐसे में एक तरफ लोग धरना प्रदर्शन कर रहे हैं तो दूसरी तरफ अंकिता के माता-पिता एक स्थानीय पत्रकार की मदद से हाईकोर्ट पहुंचे हैं। इसी मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा था कि अंकिता के कमरे को तोड़ने से पहले वहां से क्या साक्ष्य एकत्रित किये गये? पता चला कि कमरे को तोड़ने से पहले कोई भी फॉरेंसिक साक्ष्य एकत्रित नहीं किया गया था। कमरे से सिर्फ एक बैग हटाया गया था जो अंकिता का बताया जा रहा है। अंकिता का मोबाइल एसआईटी अब तक बरामद नहीं कर पाई है। लोग बार-बार पूछ रहे हैं कि आखिर वह वीआईपी कौन था? लेकिन पुलिस और एसआईटी ने अभी तक यह तक साफ नहीं किया है कि उस दौरान उस रिसोर्ट में कौन-कौन से वीआईपी आए थे और आमतौर पर कौन-कौन से वीआईपी वहां आते जाते रहते थे। यह एक गंभीर मसला बनता जा रहा है, जिस पर धामी सरकार से सवाल दर सवाल पूछने की दरकार है।

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