ऐसे कैसे निपटेंगे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से

वास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय की ओर से हाल ही में स्वच्छ सर्वेक्षण के नतीजे घोषित किये गये। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून सहित कई शहरों व कस्बों में खूब धूमधाम से प्रचारित किया गया। हालांकि इस प्रचार में असली फैक्ट छिपा दिये गये। मसलन सर्वेक्षण में शामिल 4320 शहरों में से देहरादून को 82वीं रैंक मिलने की बात कही गई और इसी बात पर कुछ नेताओं ने अपना स्वागत सत्कार भी करवा लिया। जबकि इसलियत यह है कि देहरादून 1 से 10 लाख की आबादी वाले 272 शहरों में 82वें स्थान पर आया था। लेकिन, अब नीति आयोग के शहरी सूचकांक-2021-22 ने इस हेकड़ी का उतार दिया है। यह सूचकांक बताता है कि सतत विकास लक्ष्य हासिल करने के लिए किये गये प्रयासों में देहरादून का नंबर देश के 56 शहरों में 35वां है। खास बात यह है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों ने निपटने के लिए देहरादून में किये जा रहे उपायों में स्थिति बेहद चिन्ताजनक है। इस गोल में देहरादून को 100 में से सिर्फ 45 नंबर मिले हैं।

इस इंडेक्स में हमारे पड़ोसी हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला को देशभर में पहला स्थान मिला है। उत्तराखंड के केवल देहरादून शहर को ही इस इंडेक्स में शामिल किया गया है। एसडीसी फाउंडेशन ने कहा है कि विकास के इस नये दौर में जनप्रतिनिधियों को पुराना ढर्रा छोड़कर डेवलपमेंट के नये गोल्स के हिसाब से खुद को अपडेट करने की जरूरत है।

क्या है सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी)

1. गरीबी पूरी तरह समाप्त करना
2. भुखमरी पूरी तरह समाप्त करना
3. अच्छा स्वास्थ्य और जीवन स्तर
4. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
5. लैंगिक समानता
6. साफ पानी और स्वच्छता
7. सस्ते और स्वच्छ ईंधन
8. रोजगार और अािर्थक विकास
9. उद्योग और बुनियादी ढांचे का विकास
10. असमानता दूर करना
11. शहरी और सामुदायिक विकास
12. जिम्मेदारी के साथ उपभोग और उत्पादन
13. जलवायु परिवर्तन
14. पानी में जीवन
15. भूमि पर जीवन
16. शांति और न्याय के लिए संस्थान
17. लक्ष्य प्राप्ति में सामहिक भागीदारी

संयुक्त राष्ट्र संघ ने दुनिया के लिए सहस्राब्दि विकास लक्ष्य यानी मिलेनियम डेवलपमेंट गोल्स निर्धारित किये थी। इनकी समय सीमा 2015 में समाप्त हो गई थी। इनके स्थान पर अब 2030 तक के लिए सतत विकास लक्ष्य यानी सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल निर्धारित किये गये हैं। यह कुल 17 लक्ष्य हैं-

 

क्या है एसडीजी इंडेक्स
एसडीसी फाउंडेशन के अनूप नौटियाल के अनुसार सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल को स्थानीय स्तर पर लागू करने के लिए नीति आयोग ने यह इंडेक्स जारी किया है। इसमें सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय मुद््दों को ध्यान में रखते हुए रैंकिंग की गई है। रैंकिंग में इस बात का भी ध्यान रखा गया है कि संबंधित शहर के जन प्रतिनिनिधियों और अधिकारियों ने इन गोल्स को स्थानीय स्तर पर लागू करने के लिए क्या योजनाएं बनाई और उन योजनाओं को किस तरह से लागू किया। अनूप नौटियाल के अनुसार अब शहरी निकायों को एसडीजी प्रोग्रेस के मैकेनिज्म भी डेवलप करने होंगे। यानी कि डेटा तैयार करना, मॉनीटरिंग करना और रिपोर्टिंग करना भी इसमें शामिल है। इस इंडेक्स का दूसरा उद््देश्य डेटा इकट््ठा करना है। किसी भी योजना का बनाते समय या उस पर कोई फैसला लेते समय डेटा बेहद जरूरी हो जाता है। नीति आयोग ने यह रैंकिंग 14 लक्ष्य, 46 टारगेट और 77 इंडेक्स के आधार पर की है। इसके लिए शहरों को शून्य से 100 तक अंक दिये गये।

औसत से नीचे देहरादून
इस इंडेक्स में देहरादून का प्रदर्शन औसत से कम रहा है। 56 शहरों में से दून को 35 वां स्थान मिला। दून में 63.71 अंक हासिल किये, जबकि पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला 75.50 अंक लेकर देशभर में पहले स्थान पर रहा। 73.29 अंक लेकर कोयम्बटूर दूसरे और 72.36 अंक लेकर चंडीगढ़ तीसरे स्थान पर रहा। यानी कि देश के 34 शहरों ने सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स को स्थानीय स्तर पर लागू करने के मामले में देहरादून से बेहतर किया है और 21 शहरों की स्थिति देहरादून की तुलना में खराब रही है।

एसडीसी फाउंडेशन के अनूप नौटियाल का कहना है आज हम विकास के उस दौर में हैं, जहां बात सिर्फ विकास की नहीं सतत विकास की है। इस हमें हर पहलू देखना है आर्थिक पहलू भी और पर्यावरणीय पहलू भी। इसके लिए हमें आंकड़ों की जरूरत होती है। अर्बन इंडेक्स का यही उद््देश्य है। उनका कहना है कि अब अधिकारियों और कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों को विकास के नये पैमाने के अनुसार खुद का ढालना और अपडेट करना होगा। पुराने ढर्रे पर चलकर विकास की नहीं होगा और हम बुरी तरह पिछड़ जाएंगे।

किस गोल में कितने अंक
देहरादून को सभी के लिए सुलभ और स्वच्छ ईंधन गोल में सबसे ज्यादा 96 अंक मिले हैं। जबकि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए किये गये उपायों में देहरादून काफी पीछे है। इस गोग में सिर्फ सिर्फ 31 अंक मिले हैं। इसके अलावा शांति सभी के लिए न्याय व जवाबदेह संस्थाओं के निर्माण में दून को 80 अंक, लैंगिक समानता में 79, प्रोडक्शन पैटर्न सुनिश्चित करने में 78, साफ पानी और सेनेटेशन गोल में 77, क्वालिटी एजुकेशन में 72, गरीबी उन्मूलन, आर्थिक विकास के लिए किये गये कार्य और स्वास्थ्य के क्षेत्र में किये गये कार्याें के लिए 59-59 अंक, असमानता कम करने के लिए 58, बस्तियों को बेहतर बनाने के लिए 52, इंफ्रॉस्ट्रक्चर के लिए 47, भुखमरी कम करने के लिए 45 अंक मिले हैं।

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