धंसता शहर, सड़कों पर नागरिक

जोशीमठ के धंसने का कारण है जल विद्युत परियोजना

रीब 14 महीने पहले चमोली जिले के जोशीमठ के एक हिस्से के लोगों ने महसूस किया कि उनके घरों में जगह-जगह दरारें आ रही हैं। उन्होंने महसूस किया कि दिन प्रति दिन ये दरारें ज्यादा चौड़ी होती जा रही हैं। जोशीमठ का वह क्षेत्र छावनी बाजार कहलाता है, जहां सबसे पहले इस तरह की दरारें देखी गई। यहां के लोगों ने संबंधित अधिकारियों को सूचना दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। राज्य के लगभग हर आंदोलन में शामिल होने वाले जोशीमठ के एक्टिविस्ट अतुल सती को पता चला तो वे प्रभावित लोगों को लेकर संबंधित अधिकारियों से मिले, ज्ञापन दिये गये। लेकिन, अधिकारी तो दूर जोशीमठ के दूसरे हिस्सों में रहने वालों ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया।

कुछ महीने बीतते न बीतते जोशीमठ के दूसरे हिस्सों में भी इस तरह की दरारें आने लगी। घर ही नहीं सड़कें भी धंसने लगी और कई जगह सड़कों को गड्ढे होने लगे। इस गड्ढों को भरा गया तो फिर से गड्ढे होने लगे। ऐसा ही छावनी बाजार के घरों में पड़ रही दरारों में भी हुआ। लोग पत्थर मिट्टी डालकर इन दरारों को पाटते, लेकिन एक-दो दिन बार फिर से दरारें और चौड़ी होकर नजर आने लगती। कुछ जागरूक लोग लगातार इस मसले को लेकर सरकार, अधिकारियों और आम लोगों को आगाह करते रहे। एक्टिविस्ट अतुल सती इस मसले में सबसे प्रमुखता के साथ सक्रिय रहे। वेे एक तरफ सोशल मीडिया पर जोशीमठ के धंसाव को लेकर लगातार लिखते रहे तो दूसरी तरफ देश-विदेश के मीडिया संस्थानों से संपर्क कर इस बारे में खबरें देश-दुनिया तक पहुंचाते रहे।

पर्यावरण पत्रिका डाउन टू अर्थ में जोशीमठ धंसाव पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित हुई।

सरकार ने भूवैज्ञानिकों से सर्वे करवाने की बात नहीं मानी तो अपने स्तर पर पर्यावरणविद् प्रो. रवि चोपड़ा, भूवैज्ञानिक डॉ. नवीन जुयाल और डॉ. एसपी सती से भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण करवाया और यह रिपोर्ट सरकार तक पहुंचाई। बाद में एक सरकारी टीम ने भी सर्वेक्षण किया। दोनों रिपोर्टों में यह बात साफ तौर पर कही गई कि जोशीमठ में अब और निर्माण कार्य नहीं किये जाने चाहिए। लेकिन, तब भी सरकार नहीं मानी। एक तरफ जोशीमठ के आसपास बन रही भारी-भरकम जल विद्युत परियोजनाओं का काम तो चल ही रहा है, जोशीमठ की जड़ को हेलंग-विष्णुप्रयाग बाइपास के नाम पर खोदने का काम शुरू कर दिया गया है।

अब जागा जोशीमठ
देश-विदेश के पर्यावरण से जुड़े तमाम पत्र-पत्रिकाएं, पोर्टल और न्यूज व यूट्यूब चैनल बेशक जोशीमठ को लेकर चिन्ता जताते रहे हों, जोशीमठ को कुछ जागरूक नागरिक बेशक लोगों को जोशीमठ के धंसाव के मसले को उठाते रहे हों, लेकिन जोशीमठ के लोग चुप थे। अब जबकि लगभग हर क्षेत्र धंसने लगा है। घरों और सड़कों पर हर जगह दरारें आने लगी हैं और लोग घरों को छोड़ने के लिए मजबूर होने लगे हैं तो जोशीमठ के लोग सड़कों पर निकले हैं। 24 दिसंबर को जोशीमठ के हजारों लोग सड़कों पर उतरे।

प्रदर्शन की अगुआई कर रहे अतुल सती की माने तो जोशीमठ की 20 से 25 हजार की आबादी में से 10 प्रतिशत लोग सड़कों पर उतरे। छोटे से जोशीमठ में सड़कों पर उतरने वाले लोगों की संख्या 2 से 3 हजार थी। सड़क जाम रही, बाजार पूरी तरह से बंद रहे। जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले किये गये इस प्रदर्शन में लोगों ने तपोवन-विष्णुगाड परियोजना बना नहीं एनटीपीसी कंपनी और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। लोगों को कहना है कि बिजली परियोजना की सुरंग जोशीमठ से नीचे से गुजर रही है और जोशीमठ के धंसाव को कारण यही सुरंग है। नारेबाजी करते हुए लोग तहसील पहुंचे और एसडीएम के माध्यम से सरकार के ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में जोशीमठ के धंसने का कारण तपोवन-विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना और हेलंग विष्णुप्रयाग बाइपास को बताया गया है। इसे दोनों निर्माणों को तुरंत बंद करने की मांग की गई है। इस प्रदर्शन के तीन दिन बीत जाने के बाद भी अब तक राज्य सरकार चुप है।

देहरादून में भी हलचल

देहरादून में पैनखंडा जनकल्याण समिति की ओर से आंदोलन के समर्थन में प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई।

जोशीमठ में जब स्थानीय लोग सड़कों पर थे तो एक छोटी से हलचल देहरादून में भी नजर आई। यहां पैनखंडा ज्योतिर्मठ जनकल्याण समिति देहरादून की बैनर तले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस उत्तरांचल प्रेस क्लब में बुलाई गई। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में जोशीमठ में हो रहे भूधंसाव पर चिन्ता जताई गई और जोशीमठ में हो रहे प्रदर्शन को समर्थन दिया गया। समिति की ओर से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भी भेजा गयां। ज्ञापन में कहा गया है कि एनटीपीसी की जल विद्युत परियोजना और हेलंग-विष्णुप्रयाग बाइपास के कारण जोशीमठ का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भरत पंवार, विनोद कपरुवान, नरेशानन्द नौटियाल, प्रकाश रावत, माधव प्रसाद सेमवाल, कृष्णा मणि थपलियाल, गुड्डू लाल और सुरभि शाम शामिल थे। समिति के सदस्यों से इस सवाल पर लगभग चुप्पी साधी कि हेलंग में महिलाओं के अपमान के मामले को लेकर जब पूरे राज्य में आंदोलन किया गया और हेलंग पर दो बार प्रदेशभर के प्रदर्शनकारी जुटे तो वे लोग चुप क्यों थे। इस टाल-मटोल के बाद समिति के लोगों ने माना कि उन्हें हेलंग के मामले में आगे आना चाहिए था।

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1 Comment
  1. Vijay Bhatt says

    आप इस पोर्टल के माध्यम से जनता के सवालों को , विकास के नाम पर पहाड़ों के साथ किये जा रहे छलावे तथा जनविरोधी नीतियों के चलते पर्यावरणीय ख़तरों को सामने लाने का शानदार प्रयास कर रहे हैं ।आपकी पत्रकारिता को सलाम ।

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