12 लोगों की मौत: हादसा नहीं, हत्या

दुर्घटना चमोली जिले में जोशीमठ के पास एक निर्माणाधीन कच्ची सड़क पर हुई

त्तराखंड में फिर एक बड़ी सड़क दुर्घटना में 12 लोगों की मौत हो गई। दुर्घटना चमोली जिले में जोशीमठ के पास एक निर्माणाधीन कच्ची सड़क पर हुई। जोशीमठ की उर्गम घाटी में पल्ला, जखोला के लिए सड़क अभी बन ही रही है। इसके बावजूद कुछ महीने पहले इस सड़क पर चमोली के डीएम अपनी सरकारी गाड़ी से घूम आये। स्थानीय लोगों ने देखा कि जब डीएम की गाड़ी जा सकती है तो बाकी गाड़ियां क्यों नहीं? कुछ ट्रेकर मालिकों ने अपना ट्रैकर इस रास्ते पर लगा दिया। जिस घाटी के लोग अब तक अपने गांव पहुंचने के लिए कई किमी पैदल चलते हैं, उन्हें जोशीमठ में अपने गांव पहुंचने के लिए गाड़ी मिली तो भला वे कैसे चूकते? वैसे भी यह संदेश तो घाटी के लोगों तक पहुंच चुका था कि पल्ला-जखोला रोड पर डीएम साहब की गाड़ी चली गई है। यानी कि सड़क बन गई है।

जोशीमठ में पल्ला-जखोला के लिए ट्रैकर मिला तो घाटी के कई लोग उसमें सवार हो गये। ड्राइवर ने किसी को मान नहीं किया। नई-नई सड़क थी, लोगों में उत्साह था। ऐसे में जितने को गाड़ी में ठूंसे जा सके, ठूंस दिये गये। चार लोग छत पर भी बैठ गये। कुल 9 सवारियांे की क्षमता वाली गाड़ी ड्राइवर सहित 20 लोगों को लेकर नई-नई पल्ला-जखोला रोड पर निकली। बताते हैं कि पल्ला गांव के पास चढ़ाई पर गाड़ी चढ़ नहीं पाई। सड़क नई-नई खोदी हुई थी, मिट्टी पत्थर वाली। गाड़ी पीछे खिसकने लगी तो दो लोगों ने नीचे उतरकर पिछले टायर पर पत्थर लगाने का प्रयास किया। लेकिन गाड़ी में लोड इतना था कि पत्थर से भी नहीं रुक पाई। ड्राइवर ने नियंत्रण खो दिया। गाड़ी तेजी से पीछे आई और फिर खाई की तरफ लुढ़क गई। करीब 700 मीटर गहरी खाई में। जो 20 सवारियां गाड़ी में थी, उनमें से दो लोग पत्थर लगाने के लिए उतरे थे तो बच गये। छत पर बैठे 4 लोगों ने गाड़ी के लुढ़कते ही छलांग लगा दी थी। बाकी 14 सवारियां के साथ गाड़ी गहरी खाई में जा गिरी। दुर्गम क्षेत्र होने के कारण राहत और बचाव कार्य देर से शुरू हुए। किसी तरह एसडीआरफ और एनडीआरएफ ने गहरी खाई में उतरकर रेस्क्यू अभियान चलाया 12 शव और दो घायल निकाले गये।

आरटीओ से अनुमति नहीं
जिस उर्गम पल्ला-जखोला-किमाणा रोड पर यह हादसा हुआ, वह अभी बन ही रहीे है। आरटीओ ने अब तक इस सड़क पर चलने की इजाजत नहीं दी है, इसके बावजूद चमोली के डीएम हिमांशु खुराना की गाड़ी कुछ महीने पहले डुमक गांव तक पहुंच गई थी। स्थानीय लोगों की माने तो उसके बाद से ही कुछ लोग इस रोड पर ट्रैकर में सवारियां ढोने लगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चहेते डीएम संभवतः नियम कायदों से बाहर हैं। बिना आरटीओ से पास हुए निर्माणाधीन सड़क पर अपनी गाड़ी ले जाकर उन्होंने स्थानीय लोगों को इस सड़क पर चलने के लिए प्रोत्साहित किया। ऐसे में उर्गम घाटी की इस दुर्घटना के लिए पूरी तरह से डीएम चमोली को जिम्मेदार माना जाना चाहिए।

सिर्फ ड्राइवर नहीं जिम्मेदार
आमतौर पर किसी भी सड़क हादसे में बाद ड्राइवर की लापरवाही बता दी जाती है, जबकि वास्तव में सड़क हादसे सिर्फ ड्राइवर की गलती से नहीं होते। इस कारणों को जानने की जरूरत ही नहीं समझी जाती। जिस राज्य में मुख्यमंत्री शरीर पर मिट्टी लथेड़कर आरोग्य रहने का संदेश देता हो, उस राज्य में सड़क दुर्घटनाओं के कारणों के बारे में गंभीर और वैज्ञानिक जांच हो पाना संभव भी नहीं है।

 

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