क्या वन्य जीवों का व्यवहार बदल रहा है?

उत्तराखंड में सामने आया गुलदार के हमले का एक वीडियो गंभीर संकेत दे रहा है

त्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष बेकाबू हो रहा है और यदि इस तरफ ध्यान नहीं दिया गया तो यह संघर्ष आरपार की लड़ाई का रूप ले सकता है। वैसे तो उत्तराखंड जैसे वनों की बहुलता वाले राज्य के मानव और वन्य जीवों का संघर्ष होता ही रहा है। लेकिन, पहले दोनों के बीच एक लिहाजदारी भी थी। मनुष्य को देखकर वन्यजीव छिप जाते थे और हिंसक वन्यजीवों को देखकर मनुष्य अपना रास्ता बदल देते थे। हाल के दिनों में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वन्य जीवों ने मनुष्य की लिहाजदारी लगभग छोड़ दी है और इसका कारण जंगलों के उनके लिए भोजन की कमी हो सकती है।

पिछले दिनों उत्तराखंड से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जो बेहद चिन्ताजनक स्थितियों की ओर संकेत करता है। इस वीडियो में गुलदार पीछा करके दो महिलाओं पर हमला करता है नजर आ रहा है। यह वीडियो घटनास्थल से कुछ दूरी पर बनाया गया प्रतीत हो रहा है। इस घटना में दो आश्चर्यजनक बातें सामने आई हैं, जो भी जो वन्यजीवों के व्यवहार में बदलाव के चिंताजनक पहलू की तरफ संकेत करती हैं।

आमतौर पर गुलदार बड़े लोगों या बड़े जीवों पर हमला नहीं करता। वह ऐसे छोटे बच्चों और छोटे जानवरों पर भी हमला करता है, जिन्हें वह जबड़े में दबाकर या घसीट कर कुछ दूर तक ले जा सके। लेकिन, इस घटना में गुलदार पहले एक महिला पर हमला करता है, वह महिला पहाड़ी से नीचे लुढ़क जाती है। गुलदार उसे छोड़कर दूसरी महिला पर हमला करता है और भाग जाता है। दरअसल दोनों महिलाओं का वजन इतना कम नहीं है कि गुलदार जबड़े में दबा कर उन्हें ले जा सके या घसीट कर ले जा सके। दूसरा चिंताजनक पहलू यह है कि गुलदार पीछा करके हमला करता है। आमतौर पर गुलदार बेहद शर्मीला जीव माना जाता है। वह शिकार का पीछा नहीं करता, बल्कि घात लगाकर बैठता है और मौका मिलते ही हमला करता है।

बुजुर्ग को भालुओं ने बुरी तरह नोंच लिया। हालांकि बुजुर्ग ने डटकर दो भालुओं का सामना किया।

गुलदार के व्यवहार में यह बेहद अप्रत्याशित और चिन्ताजनक बदलाव है। यह वीडियो लगभग पूरे राज्य के लोग देख चुके हैं, लेकिन अब तक इस पर किसी तरह की कोई टिप्पणी न तो वन विभाग की ओर से आई है और न ही वन्य जीवों और उनके व्यवहार पर नजर रखने वाले लोगों की तरफ से भी इस बारे में अब तक कोई टिप्पणी सुझाव आया है। बात बोलेगी की माध्यम से हम सरकार, तमाम संबंधित अधिकारियों और पर्यावरण चिन्तकों से तरफ ध्यान देने की गुजरिश करते हैं।

हालांकि इस वीडियो में मनुष्य में व्यवहार में भी परिवर्तन होने के संकेत मिले हैं। वीडियो बनाने वाला व्यक्ति चुपचाप वीडियो बना रहा है। हल्की हंसी की आवाज भी पीछे से आती प्रतीत हो रही है। जबकि आमतौर पर यदि वन्यजीव किसी पर हमला करते हैं कि लोग शोर-शराब करते हैं, ताकि हमलावर जानवर भाग जाए। लेकिन, इस वीडियो में वीडियो बनाने वाला चुप है। मानो कि सांस तक न ले रहा हो। वह विचलित भी नहीं है, बल्कि हल्की हंसी की आवाज आ रही है। बहरहाल।

हाल के कुछ दिनों में राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष की कई घटनाएं सामने आई हैं। 10 दिन के अंदर राज्य में 3 बच्चों को गुलदार ने मार डाला और एक बुजुर्ग पर भी हमला किया। 29 नवंबर को अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट तहसील क्षेत्र के देना गांव में 65 वर्षीय बुजुर्ग मोहन राम पर दो भालुओं ने हमला कर दिया। वे अपने पशुओं को चराने गए थे। टिहरी जिले में घनसाली क्षेत्र में 12 साल के बच्चे को 27 नवंबर को गुलदार ने मार डाला। फलोदी गांव का रहने वाला रणवीर चंद रमोला नाम का यह बच्चा दूसरे बच्चों के साथ खेलने के लिए घर से करीब आधा किलोमीटर दूर हो गया था, वापस लौटते हुए गुलदार ने उसे मार डाला। 22 नवंबर को पौड़ी जिले के पाबौ ब्लॉक के निसणी गांव के 5 साल के पीयूष को गुलदार ने मार डाला।

इस बीच उत्तराखंड विधानसभा का दो दिन में कुछ घंटे का सत्र देहरादून में संपन्न हुआ, लेकिन इस सत्र में भी मानव वन्यजीव संघर्ष को लेकर कहीं से कोई आवाज नहीं उठी। इससे साफ है कि उत्तराखंड सरकार ने राज्य के लोगों को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। उत्तराखंड में एक तरफ सरकार वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए अपनी पीठ थपथपा रही है, लेकिन दूसरी तरफ यहां के निवासियों को वन्यजीवों के हमलों से बचाने के लिए अब तक कोई प्रयास सामने नहीं आए हैं और तो और बंदरों और जंगली सूअर उसे खेती को कैसे बचाया जाए इस बारे में भी राज्य सरकार ने अब तक कोई नीति बनाना तो दूर फौरी कदम तक नहीं उठाए हैं।

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