ठंडे उत्तराखंड की गर्मी का संसद में जिक्र

लोकसभा में दी गई जानकारी इस वर्ष उत्तराखंड में सबसे ज्यादा हीट वेव की घटनाएं हुई

त्तराखंड की गिनती ठंडे राज्यों में की जाती है। गर्मी के मौसम में देश के गरमी वाले हिस्सों से लोग पर्यटन अथवा तीर्थयात्रा के इरादे से उत्तराखंड आते हैं, ताकि कुछ दिन गर्मी से राहत मिल सके। लेकिन अब लगता है कि उत्तराखंड का यह सुहाना मौसम अब क्लाइमेट चेंज की भंेट चढ़ जाएगा। आज यानी 7 दिसम्बर, 2022 को बताया कि इस वर्ष उत्तराखंड में हीट वेव यानी लू चलने की सबसे ज्यादा घटनाएं दर्ज की गई। विज्ञान और प्रोद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेन्द्र सिंह ने लोक सभा में मौसम संबंधी आंकडे़ प्रस्तुत करते हुए यह जानकारी दी।

लोकसभा में प्रस्तुत किये गये मौसम संबंधी आंकड़ों के अनुसार पिछले 30 वर्षों के अवधि के दौरान 5 राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिमी बंगाल, मेघालय और नागालैंड में मानसूनी बारिश में भारी कमी दर्ज की गई है। पिछले वर्ष देश में 240 तूफान आये, जबकि 2021 में सिर्फ 45 तूफान आये थे। मौसम संबंधी ये सभी घटनाएं गंभीर संकेत देती प्रतीत हो रहे हैं। हाल के वर्षों में उत्तराखंड में बारिश की मात्रा में कोई खास कमी तो नहीं आई है, लेकिन बारिश में अनियमितता बड़े पैमाने पर दर्ज की गई है।

अब बिना बारिश भी दरक रहे हैं उत्तराखंड में पहाड़।

संसद में यह जानकारी दिये जाने से पहले देहरादून स्थिति एसडीसी फाउंडेशन ने इस वर्ष मई में बढ़ते तापमान पर एक वर्चुअल बातचीत का आयोजन किया था। इस बातचीत में नेशनल फेम एनवायर्नमेंट एक्टिविस्ट और लेखक चंद्रभूषण ने उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में हीट वेव और हीट डेज की संख्या में हुई बढ़ात्तरी होने की बात कही थी।। उन्होंने आगाह किया था कि यदि हमने जरूरी कदम नहीं उठाये तो आने वाले समय में स्थितियां हाथ से निकल जाएंगी और तब हमारे सामने तबाही के अलावा कुछ नहीं रहेगा।

चंद्रभूषण ने कहा था कि दुनिया में औद्योगिक क्रांति शुरू होने से पहले धरती का तापमान 3 लाख वर्षों में एक डिग्री बढ़ा था, लेकिन उसके बाद के सिर्फ 150 वर्षों में ही एक डिग्री की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। धरती का तापमान 1 डिग्री बढ़ने का अर्थ यह है कि कई जगहों पर यह 5 से 6 डिग्री तक बढ़ा है। इसके साथ ही इसका अर्थ यह भी है कि हीट डेज की संख्या बढ़ी है। इस वर्चुअल संवाद में यह बात भी कही गई थी कि 2022 में हिमाचल प्रदेश में अप्रैल के महीने में हीट वेव डेज की संख्या 21 और उत्तराखंड में 4 थी।

क्या है हीट वेव

पहाड़ी इलाकों में यदि तापमान 30 डिग्री से ज्यादा और मैदानी क्षे़त्रों में 40 डिग्री से ज्यादा दर्ज किया जाता है तो उसे हीट डे कहा जाता है। इसके अलावा यदि किसी दिन तापमान सामान्य से 4.5 से 6.5 डिग्री तक ज्यादा हो तो उसे भी हीट डे माना जाता है। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में इस वर्ष अप्रैल, मई और जून के महीनों में कई दिन ऐसे रहे, जब अधिकतम तापमान सामान्य से 7 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा दर्ज किया गया।

दून में अब पहले जैसी बात नहीं

एसडीसी फाउंडेशन में वर्चुअल संवाद में चंद्रभूषण ने यह भी कहा था कि देहरादून की स्थिति अब पूरी तरह से बदल चुकी है। कुछ वर्ष पहले तक देहरादून में आमतौर पर पंखे की भी जरूरत नहीं होती थी, लेकिन अब मार्च में ही एसी चलने लगते हैं। पिछले 10 वर्षों में सभी हिमालयी राज्यों में हीट डे की संख्या बढ़ी है।

ये भी प्रमुख कारण

उत्तराखंड में हीट वेव और हीट डेज की संख्या बढ़ाने में जंगलों की आग का भी महत्वपूर्ण योगदान है। 10-15 साल पहले राज्य में जंगलों में आग की 150 तक घटनाएं होती थी, लेकिन अब इनकी संख्या 3 से 4 हजार तक पहुंच रही है। साथ ही हीट वेव भी जंगलों की आग की घटनाएं बढ़ाने में सहायक हो रही है। विकास के नाम पर बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने जा रहे हैं। यह भी साफ है कि जिन शहरों में पेड़ों की संख्या ज्यादा है, वहां अपेक्षाकृत तापमान कम दर्ज किया गया। पर्वतीय क्षे़त्रों में परंपरागत घरों की जगह कंक्रीट के घर बनाने की प्रवृत्ति भी हीट वेव का कारण बन रही है।

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