भोपाल गैस त्रासदी के 37 साल: भोपाल के साथ भेदभाव कर रहा है डाव केमिकल्स?

Rakesh Kumar Malviya

 

भोपाल गैस त्रासदी की 37वीं बरसी पर शहर के चार पीड़ित गैस पीड़ित संगठनों ने यूनियन काबाईड कंपनी डाव केमिकल्स को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि डाव केमिकल्स दुनिया में दूसरी जगहों पर तो कंपनी द्वारा पहुंचाए गए पर्यावरणीय नुकसानों की सीधे पूर्ति कर रहा है, लेकिन भारत की भीषणतम गैस त्रासदी के मामले में उसका रवैया भेदभावपूर्ण है। 

भोपाल गैस त्रासदी की 37वीं बरसी पर आयोजित पत्रकारवार्ता में एRaलजीबीटी कार्यकर्ता संजना सिंह शामिल हुईं और वरिष्ठ एलजीबीटी कार्यकर्ता पीटर टैचेल के द्वारा जिम फिटरलिंग को लिखा पत्र सार्वजनिक किया, जिसमें उन्होंने जिम को ताकीद किया है कि वह भोपाल गैस कांड की जिम्मेदारी को समझें और पुरानी भूलों को सुधारें। उल्लेखनीय है कि बीस साल पहले यूनियन कार्बाइड का डाव केमिकल में विलय कर दिया गया था।

भोपाल गैस कांड पीड़ित और एलजीबीटी कार्यकर्ता संजना सिंह कहती हैं कि एलजीबीटी हमें समाज में हर तरह के भेदभाव के खिलाफ लड़ना सिखाता है। 2014 में समलैंगिक के तौर पर सार्वजनिक रूप से सामने आने वाले फिटरलिंग जो भेदभाव के खिलाफ खड़े होने का दावा करते हैं और वहीं दूसरी तरफ भोपाल गैस पीड़ितों के साथ भेदभाव करने वाली कम्पनी का नेतृत्व कर रहे हैं फिर भी भोपाल गैस पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा है।

भारत में डाव केमिकल ने अब तक 6 तामीली नोटिसों को नजरअंदाज किया है। वह यह दावा कर रही है कि भारतीय अदालतों का डी डाव केमिकल कम्पनी- अमरीका (टीडीसीसी) पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है। उन्होंने बताया कि डाव केमिकल के दोहरे मापदंड उनके संचालन के हर पहलू में स्पष्ट है।

भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की शहजादी बी ने बताया, 2014 में डाव ने मिशिगन राज्य के फ्लिंट शहर के पेयजल स्त्रोत के दूषित होने पर वाटर फिल्ट्रेशन प्लाइंट लगवाने पर एक लाख डॉलर का दान किया, लेकिन भोपाल शहर के लिए क्यों उसका यह रवैया सामने नहीं आया।

डाव केमिकल इस बात की की अनदेखी कर रहा है कि यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे की वजह से प्रदूषित भूजल क्षेत्र में रहने वाली माताओं के दूध में पारा और कैंसर पैदा करने वाले रसायन पाए गए हैं जो उनके शिशु के लिए घातक हैं। यह बेहद शर्मनाक है कि डाव ने इस जहरीले कचरे की सफाई के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाए हैं।

भोपाल गैस पीड़ितों की ओर से बच्चों का प्रतिनिधित्व करने वाली नौशीन खान ने आरोप लगाया कि अमरीका में डाव कम्पनी के मिडलैंड मिशिगन के अपने मुख्यालय के पास टिट्टाबावसी और सैगिना नदी के मैदानों सहित 171 प्रदूषित स्थलों की सफाई के लिए भुगतान कर रहा है, लेकिन भोपाल में प्रदूषण के मामले में डाव का कहना है कि इसकी जिम्मेदारी मध्यप्रदेश सरकार की है। उन्होंने सवाल किया कि यह दोहरा रवैया क्यों ?

भोपाल ग्रुप फॉर इनफार्मेशन एंड एक्शन की रचना ढिंगरा ने बताया कि डाव केमिकल अमेरिका की संस्थाओं और अदालतों में खुद को ऐसे पेश करता है जैसे उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। 2005 में डाव केमिकल की एक संयुक्त कम्पनी को सिंथेटिक रबर की कीमतों को ठीक करने के शर्मन अधिनियम का दोषी पाया गया था। इसे एक अंतरराष्ट्रीय साजिश करार देते हुए 84 मिलियन डॉलर का जुर्माना भी अदा करवाया गया था।

भारत में डाव केमिकल ने अब तक 6 तामीली नोटिसों को नजरअंदाज किया है। वह यह दावा कर रही है कि भारतीय अदालतों का डी डाव केमिकल कम्पनी- अमरीका (टीडीसीसी) पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है। उन्होंने बताया कि डाव केमिकल के दोहरे मापदंड उनके संचालन के हर पहलू में स्पष्ट है।

भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की रशीदा बी ने बताया कि डाव केमिकल के प्रीमियम उत्पाद क्लोरपायरीफॉस को अमरीका में तंत्रिका तंत्र को क्षति पहुंचाने, बुद्धि में कमी, याददाश्त, अटेंशन डेफिसिट डिसऑर्डर और जन्मजात विकृति पैदा करने के कारण प्रतिबंधित किया है। डाव केमिकल से जुड़ी कंपनी कॉरटेवा क्लोरपायरीफॉस को भारत में डर्सबैन ब्रांडनाम से बेचती है और स्वास्थ्य सम्बन्धी खतरों की वजह से अमरीका में लगे प्रतिबंध का कभी जिक्र भी नहीं करती।

उल्लेखनीय है कि भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ित लोग पिछले सैंतीस दिनों से सरकार से एक सवाल कर यह मुददा उठा रहे थे कि घटना के इतने साल गुजर जाने के बाद भी पीड़ितों को अब तक न्याय नहीं मिला है और वह कई किस्म की समस्याओं से गुजर रहे हैं।

डाउन टू अर्थ से साभार

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